12 जून, 2017 को तिरूवनंतपुरम, केरल में केरल सरकार के अणुयात्रा अभियान के अधीन एम पावर कार्यक्रम की शुरूआत के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री मो. हामिद अंसारी द्वारा दिया गया भाषण

तिरूवनंतपुरम, केरल | जून 12, 2017

मुझे विशेष निशक्तता से ग्रस्त बालकों को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से चलाये गये एक रचनात्मक कार्यक्रम की शुरूआत करने के लिए यहां आमंत्रित किए जाने की खुशी है। मुझे आमंत्रित किए जाने के लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूँ।

जन शिक्षा के प्रति केरल की प्रगतिशील और नवोन्मेषी नीति सुविख्यात है। इसका एक पहलू नि:शक्तता से ग्रस्त बालकों की शिक्षा है। नि:शक्तता, विशेष रूप से हमारे जैसे विकासशील समाज में एक महत्वपूर्ण जन स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। असंक्रामक रोगों में वृद्धि और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के साथ आयु संरचना में परिवर्तन के कारण ऐसी संभावना है कि यह एक प्रमुख विचारणीय नीतिगत मुद्दा बना रहेगा।

नि:शक्तता, चाहे वह शारीरिक हो या बौद्धिक, का प्रकटन भी सामाजिक संदर्भों के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है और पुनर्वास उपायों को इससे प्रभावित व्यक्तियों की जरूरतों के अनुसार सामुदायिक भागीदारी के साथ लक्षित होना चाहिए।

हमारे देश में, विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त अधिकांश व्यक्ति ग्रामीण इलाकों में रहते हैं जहां पुनर्वास सेवाओं की पंहुच, उपलब्धता और उपयोग और उनकी लागत-प्रभावकारिता ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दें हैं जिनपर विचार किया जाना अपेक्षित है। नि:शक्तता के बोझ, उपयुक्त हस्तक्षेप कार्यनीतियों और उनके कार्यान्वयन संबंधी अनुसंधान अब भी अत्यंत शुरूआती अवस्था में है।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा समर्थित एक सर्वेक्षण का यह अनुमान था कि हमारे देश में 0-19 आयु वर्ग में 1.67 प्रतिशत जनसंख्या विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त है और विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त सभी लोगों में 35.29 प्रतिशत बच्चे हैं। इसी प्रकार अन्य अनुमान भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत में लगभग 12 मिलियन बच्चे विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त हैं परंतु ऐसे बालकों में केवल 1 प्रतिशत बालक ही स्कूल जाते हैं।

विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति, विशेष रूप से बच्चे, मुख्य रूप से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के कार्यक्षेत्र के अधीन आते हैं। ऐसे कुछ मुद्दों का निपटान स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किया जाता है। किसी एकल केन्द्रित संस्थान के अभाव के परिणामस्वरूप प्राय: एकीकृत कार्यक्रम का अभाव हो जाता है। विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए निधियों का आबंटन और उनका उपयोग और समाज के साथ उनके जुड़ाव और उनकी देखभाल के लिए सामाजिक जागरुकता अपर्याप्त रहती है।

काफी पहले वर्ष 1978 में भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी एल्मा एटा घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ यह कहा गया था कि व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में संवर्धनात्मक, निवारक, उपचारात्मक और स्वास्थ्यलाभ संबंधी देखभाल शामिल होनी चाहिए। स्वास्थ्यलाभ के लिए तीन प्रमुख नीतियां (i) संस्थान आधारित, (ii) पंहुच आधारित, और (iii) समुदाय आधारित रही हैं।

राज्य संस्थानों के सक्रिय प्रयासों जैसे आज शुरू किए जा रहे कार्यक्रम, के साथ-साथ समुदाय आधारित स्वास्थ्यलाभ प्रयासों का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करने में सक्षम बने, उनके पास नियमित सेवाओं और अवसरों की पंहुच हो और वे अपने समुदायों के भीतर पूर्ण रूप से जुड़ने का लक्ष्य प्राप्त करें।

विशेष नि:शक्तता से ग्रस्त लोगों के लिए केरल सरकार द्वारा उसकी "अणुयात्रा" - या साथ मिलकर चलने के अभियान के अंतर्गत उठाए गए कदम उसके द्वारा किए जा रहे 20 से अधिक कार्यनीतिक हस्तक्षेप, जिनका उद्देश्य नि:शक्तता निवारण से लेकर सततपोषणीय आत्म-निर्भर पुनर्वास और आर्थिक सशक्तिकरण करना है, एक सराहनीय प्रयास है।

ये नि:शक्तता से ग्रस्त बच्चे इस नवोन्मेषी और महत्वाकांक्षी अभियान के लिए सबसे अच्छे दूत बन सकते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये बच्चे थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल और प्रोत्साहन से जबरदस्त उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं। उनकी अंतर्निहित प्रतिभा को उजागर करने के लिए जादू का प्रयोग दुनिया को यह बताने का एक रचनात्मक तरीका है कि वे नि:शक्त या असमर्थ नहीं हैं बल्कि विशेष प्रतिभा के धनी हैं; यह कि यदि उन्हें पर्याप्त सहायता दी जाए तो वे आत्मसम्मान और गरिमा के साथ कोई भी बड़ा काम करने में सक्षम हैं।

मुझे विश्वास हैं कि अपनी अद्वितीय प्रतिभाओं और समर्पण से ये विशेष बच्चे न केवल दृढ़ निश्चय और मानवीय उत्साह की जीत को दर्शाएंगे बल्कि अनेक अन्य लोगों को चुनौतियों पर विजय पाने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेंगे।

मुझे मैजिक अकादमी के सहयोग से सामाजिक न्याय विभाग के अधीन केरल सामाजिक सुरक्षा मिशन (केएसएसएम) द्वारा प्रबंधित "एमपावर" कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए आज वास्तव में काफी प्रसन्नता हो रही है।

मैं उन अधिकारियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, स्वयंसेवियों और इस परियोजना के जुड़े अन्य सभी लोगों की समर्पित टीम को शुभकामनाएं देता हूँ, जिन्होंने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए अथक रूप से कार्य किया है। आपका कार्य दुनिया में एक सकारात्मक बदलाव ला रहा है और इसके लिए आप सभी सराहना के पात्र हैं।

मैं असाधारण रूप से सक्षम बच्चों की इस टीम को अपनी शुभकामनाएं देता हूँ और आज उनका पहला कलाप्रदर्शन देखने के लिए उत्सुक हूँ।
जय हिंद।