31 मई, 2017 को नई दिल्ली में श्री एम.के. रंजीतसिंह द्वारा लिखित ए लाइफ विद वाइल्डलाइफ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री मो. हामिद अंसारी का अभिभाषण

नई दिल्ली | मई 31, 2017

पिछले दशक से पुस्तक विमोचन मेरे लिए जीवन में एक उद्देश्य की तरह हो गया है, यह मेरे लिए लगभग पेशेवर जोखिम सा बन गया है। इसके बावजूद व्यक्तिपरक और वस्तुपरक दोनों कारणों से आज का समारोह भिन्न है।

मैं व्यक्तिपरक और व्यक्तिगतरूप से शुरुआत करता हूँ। डॉ. रंजीतसिंह और मैं दोनों सिविल सेवा के 1961 के बैच के हैं और एक-दूसरे को आधी सदी से अधिक समय से जानते हैं। उनके लिए मेरे मन में काफी स्नेह और सम्मान है।

उनका वस्तुपरक और प्रशंसनीय पक्ष यह है कि वह लीक से हटकर हैं। राजनीतिक शब्दावली से परिचित लोग यह जानते हैं कि यह सामान्य रूप से काफी अर्थवान शब्द है जो ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होता है जो किसी निश्चित मार्ग से दक्षिण अथवा वाम मार्ग में चले गए हैं। मैं इस शब्द का प्रयोग उनके लिए कर रहा हूं, क्योंकि वह न तो दक्षिण मार्गी और न ही वाममार्गी बने, बल्कि अपने आपको सिविल सेवक की सामान्य परिधि से परे एक ऐसी शख्सियत के रूप में विकसित किया जो हमारे मानव अस्तित्व के समानांतर चलता है और रहस्यमयी, आकर्षक और मनमोहक होता है।

परिणाम हमारे सामने है। लेखक ने सिविल सेवक के रूप में मिले अवसर को जुनून में बदल दिया है।

भारत के वन्यजीव संरक्षण के प्रथम निदेशक के रूप में इन्होंने राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्य बनाने हेतु योजनाएं तैयार कीं। वह हमारी सर्वाधिक सफल संरक्षण परियोजनाओं में से एक प्रोजेक्ट टाइगर को तैयार करने वाले कार्य बल के सदस्य सचिव थे। इन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया।

1979 में नीदरलैंड के ऑर्डर ऑफ द गोल्डेन आर्क के सम्मान द्वारा और 1991 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के ग्लोबल 500 रोल ऑफ ऑनर के लिए चुने जाने से उनके प्रयासों को मान्यता मिली।

यह पुस्तक जो अंशत: आत्मकथा, अंशत: पर्यावरणवादी की हैंडबुक और अंशत: यात्रा वृत्तांत है, राजों-रजवाड़ों और ब्रिटिश काल से लेकर आज तक वन्यजीवन के क्रम को रेखांकित करती है। यह भारत में पर्यावरण संरक्षण का पर्यावरण संरक्षकों द्वारा प्रस्तुत किया गया वृत्तांत है, भारत में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का आधिकारिक विवरण है।

मैं इस प्रशंसनीय कार्य के लिए उन्हें बधाई देता हूँ।
जय हिन्द।